जयपुर । आज कल प्री मेच्योर डिलिवरी की घटनाए बहुत ज्यादा सुनने को मिल रही है । प्री मेच्योर डिलिवरी का मतलब है समय से पहले ही बच्चे का जन्म ले लेना । यानि सामान्य समय महीने से पहले ही बच्चे का जन्म ले लेना प्री मेच्योर डिलिवरी में आता है ।
प्रिमच्योर जन्म या समय से पहले बच्चे का जन्म तब माना जाता है जब वह प्रेग्नेंसी के 37 हफ्ते पूरे होने से पहले ही जन्म ले ले।बच्चा जितना अधिक समय गर्भ में रहता है उतना ही उसके शरीर का विकास हो पाता है। इस लिहाज से प्रिमच्योर बच्चों में जन्म से ही कुछ कमियां रहती हैं क्योंकि उनके शरीर का ठीक से विकास नहीं हो पाया।
जन्म देने वाली मां का बहुत कम उम्र का होना या अधिक उम्र होना माँ के शरीर का बॉडी मास इंडेक्स या बीएमआई कम होना,दो प्रेग्नेंसी के बीच कम अंतर होना या जल्दी-जल्दी गर्भ धारण करना,पहले से मौजूद कोई रोग,संक्रमण या इन्फेक्शन,जरूरत से ज्यादा भावनात्मक दबाव,गर्भ में एक से अधिक बच्चों का होना।
प्रेग्नेंसी में ज्यादा ब्लीडिंग होना,गर्भाशय में कुछ असामान्यता,पहले गर्भपात होना खासकर 16 से 24 सप्ताह के बीचइसके अलावा जीवनशैली और गरीबी, कुपोषण जैसे सामाजिक कारक भी प्रिमच्योर जन्म का कारण बनते हैं।
प्रे मेच्योर बच्चों का जीवन संघर्ष सामन्या बच्चों की तुलना अधिक होता है । बहुत कम ऐसा हो पाता है की ऐसे बच्चे जिंदा रह पाने में समर्थ होते हैं । विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2012 की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल लगभग 35 लाख बच्चे समय से पहले जन्म लेते हैं।
जन्म देने वाली मां का बहुत कम उम्र का होना या अधिक उम्र होना माँ के शरीर का बॉडी मास इंडेक्स या बीएमआई कम होना,दो प्रेग्नेंसी के बीच कम अंतर होना या जल्दी-जल्दी गर्भ धारण करना,पहले से मौजूद कोई रोग,संक्रमण या इन्फेक्शन,जरूरत से ज्यादा भावनात्मक दबाव,गर्भ में एक से अधिक बच्चों का होना।
क्यों होती है प्री मेच्योर डिलीवरिज ? क्या होता है उसके पीछे कारण
Reviewed by Hindi khabar
on
November 18, 2019
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