नमस्कार मित्रों आज आपका फिर से एक बार स्वागत है एक नए लेख में, दोस्तों जैसा कि आप सभी लोगों को मालूम है धर्म और सत्य की रक्षा के लिए देवताओं और दानवों के बीच हमेशा से युद्ध चलता रहता है लेकिन दोस्तों परिस्थिति उस समय और भी ज्यादा गंभीर हो गई जब दैत्यों के गुरु ने भगवान शिव शंकर को प्रसन्न करके मृत संजीवनी विद्या प्राप्त कर ली थी उसके बाद गुरु शुक्राचार्य युद्ध में मारे गए थे क्यों को पुनः मृतसंजीवनी द्वारा जीवित कर देते थे इस संकट से बचने के लिए सभी देवताओं ने गुरु बृहस्पति के पास गए।
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उसके बाद गुरु बृहस्पति ने अपने पुत्र खर्च को गुरु शुक्राचार्य के पास संजीवनी विद्या सीखने के लिए धरती पर भेजा उसके बाद गुरु शुक्राचार्य सेकच शिक्षा ग्रहण शुरू कर दिया लेकिन दोस्तों बृहस्पति के पुत्र कच्छ के दैवीय तेज को देखकर शुक्राचार्य की पुत्री उस पर मोहित हो गई लेकिन जब असुरों को यह बात पता चली। तो उन्होंने कच्छ का वध कर दिया कुछ समय बाद शुक्राचार्य की पुत्री कच्छ को ढूंढने का प्रयास करने लगी लेकिन वह नहीं मिला तो वह रोने लगी है। यह देख कर शुक्राचार्य की पुत्री के प्रेम के चलते न चाहते हुए भी कच को संजीवनी मंत्र द्वारा जीवित करना पड़ा।
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इस घटना को कुछ ही समय बिता था कि फिर से असुरों ने कच्छ का वध कर दिया लेकिन अपने पुत्र के अनुरोध पर गुरु शुक्राचार्य ने फिर से कच को जीवनदान दे दिया उसके बाद असुर समझ गया है कि कच को मारने का कोई अलग उपाय सोचना चाहिए उसके बाद असुरों ने कच को मार कर उसे जला दिया और उसकी राह को गुरु शुक्राचार्य को एक पेय पदार्थ में मिलाकर पिला दिए। उसके बाद जब देवयानी फिर से कुछ को ढूंढने लगे तो उसे कुछ नहीं मिला तब वह समझ गए कि असुरूनी फिर से कच का वध कर दिया।
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उसके बाद वह अपने पिता शुक्राचार्य को फिर से कच्छ को जीवित करने के लिए कहते हैं उसके बाद शुक्राचार्य उसको ढूंढने का प्रयास करते हैं लेकिन उन्हें वह कहीं नहीं मिलता। उसके बाद गुरु शुक्राचार्य ने कच्छ की आत्मा का आह्वान किया तो उनके शरीर के अंदर से ही आवाज आ रही थी। उसके बाद गुरु शुक्राचार्य समझ गए और वे जानते थे कि यदि क्रश को जीवित किया जाएगा तो वह स्वयं जीवित नहीं रहेंगे। उसके बाद उन्होंने मन ही मन कच की आत्मा को संजीवनी मंत्र सिखा दिया। उसके बाद गुरु शुक्राचार्य ने कच को जीवित कर दिया लेकिन गुरु शुक्राचार्य की मृत्यु हो गई। तब कच ने अपने शिष्य धर्म का पालन करते हुए फिर से गुरु शुक्राचार्य को जीवित कर दिया।
क्यों एक देवता को असुरों के गुरु शुक्राचार्य ने तीन बार जीवित किया था, जानकर होगी हैरानी
Reviewed by Hindi khabar
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December 01, 2019
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