हमारे हिन्दू धर्म में 16 संस्कार बताए गए हैं और इनमें विवाह भी एक संस्कार है। इस संस्कार के द्वारा दो व्यक्ति ही नहीं बल्कि कई परिवार और आत्माओं का भी मिलन होता है माना यह जाता है कि इस संस्कार में कई रीति रिवाज शामिल होते हैं जिनमें सुहागरात और उससे जुड़े रिवाज हैं।
वर वधू की मिलन की रात को सुहागरात कहा जाता है और इसी लिए इस दिन होने वाले कुछ रिवाज बड़े ही खास होते हैं जैसे दूध का गिलास लेकर दुल्हन का आना, कन्या को मुंह दिखाई देना।
wedding nightThird party image reference
सुहागरात के दिन दुल्हा दुल्हन अपने कुल देवी और देवता की पूजा करते हैं। इसके पीछे मान्यता यह है कि ईश्वर से हमारे कुल की परंपरा और वंश को आगे बढ़ाने के लिए आशीर्वाद मिले और फिर ऐसी धारणा है कि कुल देवता की आशीर्वाद से ही कुल की वृद्धि होती है।
wedding nightThird party image reference
हमारे पूर्वजों की पूजा। फिर विवाह से लेकर सुहागरात तक ऐसी कई रीतियां होती है जिनमें पूर्वजों की पूजा की जाती है और इसके पीछे मान्यता यह है कि पूर्वजों के आशीर्वाद से संतान का सुख मिलता है।
ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि अगर हमारे पूर्वज यानी पितृगण नाराज होते हैं तो संतान सुख में बाधा आती है और फिर विवाह का सबसे बड़ा उद्देश्य संतान प्राप्ति और वंश को बढाना होता है इसलिए पूर्वजों की पूजा सुहागरात के दिन की जाती है।
प्रतीकात्मक तस्वीर- फोटो : PixabayThird party image reference
सुहाग रात की रात में जब दुल्हन अपने पति के लिए दूध का गिलास लेकर आती है। यहां इसके पीछे ज्योतिषीय और वैज्ञानिक कारण शामिल है। दूध को चन्द्र और शुक्र की वस्तु माना गया है।
अगर शुक्र प्रेम और वासना का कारक ग्रह है तो चन्द्रमा मन का कारक ग्रह है। फिर दूध का गिलास देने के पीछे यह उद्देश्य होता है कि पति पत्नी का प्रेम दूध की तरह उज्जवल, वासना और चंचलता रहित यानी स्थिर और धैर्य वाला रहे।
BrideThird party image reference
सुहाग रात में एक रिवाज होता है घर आई नई दुल्हन को मुंह दिखाई देने का। ऐसी कथा है कि सुहागरात में ही भगवान राम ने देवी सीता को वचन दिया था कि वह एक पतिव्रत रहेंगे और इसी वचन के कारण भगवान राम ने दूसरी शादी नहीं कि और देवी त्रिकूटा भगवान के कल्कि अवतार की प्रतिक्षा में बैठी है।
दुल्हन को आज कल इस रिवाज के तहत गहने, मोबाइल जैसे उपहार मिलने लगे हैं। दरअसल इस रिवाज के पीछे यह विश्वास होता है कि स्त्री जिसे अपने पत्नी के रूप में स्वीकार कर रहे है वह इस योग्य है कि उसकी जरुरतों को पूरा कर सके। व्यवहारिक तौर पर देखा जाए तो उपहार देने के पीछे यह उद्देश्य होता है कि नए रिश्ते की शुरुआत अच्छी हो।
demo picThird party image reference
बड़े बुजुर्गो का आशीर्वाद भी सुहागरात में सबसे जरूरी रीति रिवाज होता है और इसके पीछे यह उद्देश्य है कि वर-वधू को वैवाहिक जीवन की शुरुआत के लिए शुभ कामनाएं प्राप्त हों और इसकी वजह यह है कि हिंदू धर्म के संस्कारों में किसी भी नए काम की शुरुआत में बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद शुभ बताया गया है।
वो पांच रस्में जिनके बिना अधूरी है विवाह से लेकर सुहागरात
Reviewed by Hindi khabar
on
December 03, 2019
Rating:





